हरिद्वार: उत्तराखंड में हुए बहुचर्चित अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति घोटाले की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे इसमें शामिल भ्रष्ट तंत्र के ऐसे चौंकाने वाले कारनामे सामने आ रहे हैं जिसे देखकर जांच अधिकारी भी दंग हैं। सरकार को चूना लगाने के लिए कागजों पर तैयार किए गए इस फर्जीवाड़े का दायरा बेहद बड़ा है। इस महाघोटाले की चल रही विस्तृत जांच के बाद अब तक प्रदेश और बाहरी राज्यों के करीब 92 शिक्षण संस्थानों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

फर्जीवाड़े का अनोखा खेल: उत्तराखंड की छात्रवृत्ति पर उत्तर प्रदेश में खेती कर रहे थे 'छात्र'

विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश में जो सबसे हैरान करने वाला पहलू सामने आया है, वह यह है कि जिन युवाओं के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों-करोड़ों रुपये की वजीफा (छात्रवृत्ति) राशि हड़पी गई, उन्हें खुद इस बात की कानों-कान खबर तक नहीं थी। जांच में पता चला है कि दस्तावेजों में जिन लोगों को उत्तराखंड के कॉलेजों में नियमित छात्र दिखाया गया था, वे असल में पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के गांवों में खेतों में हल चला रहे थे और खेती-किसानी के काम में व्यस्त थे।

कोई कर रहा था प्राइवेट नौकरी, तो किसी ने कभी कॉलेज का मुंह तक नहीं देखा

फर्जीवाड़े की कड़ियां यहीं खत्म नहीं होतीं। तफ्तीश में यह बात भी साबित हुई है कि कई ऐसे लाभार्थी दिखाए गए जो सालों से किसी निजी कंपनी में फुल-टाइम नौकरी कर रहे थे और कुछ अन्य राज्यों में दूसरी डिग्रियों की पढ़ाई पूरी कर रहे थे। हद तो तब हो गई जब कई ऐसे युवाओं की सूची मिली जिन्होंने जीवन में कभी भी संबंधित शिक्षण संस्थान का मुख्य द्वार तक नहीं देखा था और न ही कभी उत्तराखंड की धरती पर कदम रखा था। उनके फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज, बैंक खाते और हस्ताक्षर तैयार कर पूरी राशि बिचौलियों और कॉलेज प्रबंधकों ने आपस में बांट ली।

92 कॉलेजों पर लटकी एफआईआर की तलवार, मान्यता रद्द करने की तैयारी

इस पूरे खेल के उजागर होने के बाद समाज कल्याण विभाग और जांच एजेंसियों ने मिलकर एक बड़ी रणनीति तैयार की है। शुरुआती तौर पर दोषी पाए गए 92 उच्च और तकनीकी शिक्षण संस्थानों की सूची तैयार की गई है, जिनमें से कई संस्थान उत्तराखंड के मैदानी जिलों के अलावा अन्य राज्यों में भी स्थित हैं। इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और सरकारी धन के गबन की धाराओं में मुकदमा (FIR) दर्ज करने के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही, इन दागी संस्थानों की मान्यता हमेशा के लिए रद्द करने और ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश भी संबंधित बोर्ड को भेजी जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी दोषी अफसर, दलाल या कॉलेज संचालक को बख्शा नहीं जाएगा और हड़पी गई पूरी रकम की वसूली उनकी संपत्तियां कुर्क करके की जाएगी।