नैनीताल: हाईकोर्ट ने हरिद्वार के एक कारोबारी के बैंक खाते में 44 लाख रुपये की रकम जमा होने के बाद खाता फ्रीज करने के बैंक प्रशासन के फैसले को पूरी तरह से गलत ठहराया है। अदालत ने मामले पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि जब तक कोई स्पष्ट आपराधिक मामला न हो, तब तक बैंक तो दूर, पुलिस भी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के किसी खाताधारक की जमा राशि या खाते को फ्रीज नहीं कर सकती। कानून के तहत बैंकों के पास ऐसा करने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित बैंक को खाताधारक का खाता तुरंत प्रभाव से दोबारा चालू करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

बैंक खाते में 44 लाख रुपये आने का पूरा विवाद

यह पूरा मामला हरिद्वार के शिवालिक नगर स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा से जुड़ा हुआ है। जहां के खाताधारक मुनव्वर के खाते में 44 लाख रुपये की एक बड़ी राशि जमा हुई थी। इस राशि के खाते में पहुंचते ही बैंक प्रबंधन ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए 10 अक्टूबर 2025 को संबंधित बैंक खाता तुरंत प्रभाव से फ्रीज कर दिया था, जिससे खाताधारक अपनी ही जमा राशि का इस्तेमाल करने में असमर्थ हो गया।

तकनीकी गलती का हवाला और बैंक की मनमानी कार्रवाई

मामले की पृष्ठभूमि में यह बात सामने आई कि यश बैंक की ओर से मिली एक सूचना के आधार पर कोटक महिंद्रा बैंक ने यह कदम उठाया था। यश बैंक का दावा था कि यह 44 लाख रुपये की राशि गलती से मुनव्वर के खाते में ट्रांसफर हो गई थी। इस सूचना के मिलते ही बैंक ने खाताधारक का पक्ष सुने बिना और बिना किसी न्यायिक आदेश के खाता फ्रीज करने की एकतरफा कार्रवाई कर दी।

अदालत का कड़ा रुख और न्याय प्रक्रिया पर जोर

हाईकोर्ट ने बैंक की इस कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि वित्तीय लेन-देन में किसी भी प्रकार की गलती या विवाद होने की स्थिति में तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। बैंक प्रबंधन अपनी मर्जी से किसी नागरिक के वित्तीय अधिकारों पर रोक नहीं लगा सकता। अदालत ने माना कि यदि बैंक या किसी अन्य संस्था को राशि के गलत ट्रांसफर का संदेह था, तो उन्हें इसके लिए उचित कानूनी रास्ता चुनना चाहिए था।

अदालत का अंतिम फैसला और खाता चालू करने का आदेश

सुनवाई के अंत में अदालत ने खाताधारक के पक्ष में अपना निर्णय सुनाते हुए बैंक के फ्रीज करने के आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया। कोर्ट ने संबंधित बैंक शाखा को मुनव्वर का खाता तत्काल बहाल करने का आदेश दिया ताकि वे अपनी राशि का लेनदेन बिना किसी बाधा के कर सकें। इस फैसले ने यह भी साफ कर दिया है कि बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति और बिना किसी आपराधिक जांच के बैंकों द्वारा खाते सीज करना गैर-कानूनी है।