गोपेश्वर। विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में भगवान के पवित्र चढ़ावे में हुई वित्तीय हेराफेरी और अनियमितता के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शुक्रवार को एक और बड़ी सफलता हासिल की है। एसआईटी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में दूसरी बड़ी और कड़ी कार्रवाई करते हुए बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व टेंपल ऑफिसर यानी मंदिर अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद से मंदिर समिति के प्रशासनिक हलकों और इससे जुड़े अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।

कड़ी पूछताछ के बाद पूर्व अधिकारी गिरफ्तार

पुलिस और जांच टीम के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को शुक्रवार को तफ्तीश में शामिल होने और पूछताछ के लिए तलब किया गया था। जांच अधिकारियों द्वारा करीब चार घंटे तक चली सघन और बेहद कड़ी पूछताछ के दौरान उनके द्वारा दिए गए बयानों में भारी विरोधाभास पाया गया। मामले में संलिप्तता के पुख्ता साक्ष्य और दस्तावेज मिलने पर एसआईटी ने पहले उन्हें हिरासत में लिया और फिर वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करते हुए उनकी गिरफ्तारी दर्ज कर ली।

सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद शिकंजा

मामले में एक चौंकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी पूर्व मंदिर अधिकारी इसी वर्ष 30 जून को अपने पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अपनी राजकीय सेवा से सेवानिवृत्ति के महज कुछ ही दिनों के भीतर कानून का शिकंजा कसने और इस बड़ी दंडात्मक कार्रवाई से पूरे विभाग में खलबली मची हुई है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जांच एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त रुख अपना रही हैं।

मामले में अब तक की बड़ी कार्रवाइयां

बदरीनाथ धाम के चढ़ावे में हुई इस कथित बड़ी चोरी और हेराफेरी के उजागर होने के बाद से अब तक कई कड़े और दंडात्मक कदम उठाए जा चुके हैं। इस संवेदनशील मामले में एसआईटी ने सबसे पहली कार्रवाई करते हुए बीकेटीसी के वैयक्तिक सहायक कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिसके बाद आज पूर्व टेंपल ऑफिसर के रूप में यह दूसरी बड़ी कामयाबी मिली है। इसके साथ ही विभागीय स्तर पर तत्परता दिखाते हुए मुख्य खजांची संदीप मेहता को भी उनके पद से तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जा चुका है।

एसआईटी का अगला कड़ा कदम

पुलिस और एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पकड़े गए पूर्व अधिकारी से मिली गुप्त जानकारियों और अहम दस्तावेजों के आधार पर अब जांच का दायरा और अधिक विस्तृत किया जा रहा है। मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ संदिग्ध अधिकारियों के बैंक खातों के मिलान का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि इस बात का पूरी तरह पता लगाया जा सके कि इस पूरे खेल में मंदिर समिति के कुछ और बड़े चेहरे या रसूखदार कर्मचारी तो शामिल नहीं हैं। जांच टीम जल्द ही कुछ और संदिग्ध लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी में है।