बारिश के बावजूद केदारनाथ यात्रा सुचारु, नदियों का जलस्तर नियंत्रण में
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून की सक्रियता के चलते गुरुवार सुबह से ही लगातार हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी है। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे जनपद में सुबह से ही बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर वर्षा हो रही है। इस मानसूनी बारिश के बावजूद राहत की बात यह है कि क्षेत्र की प्रमुख नदियों के जलस्तर में कोई अप्रत्याशित बढ़ोतरी नहीं देखी गई है।
जखोली तहसील में दर्ज की गई सबसे अधिक बारिश
जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार अलग-अलग रिकॉर्ड की गई है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के वर्षा आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ घंटों में सबसे ज्यादा 46.00 मिमी बारिश जखोली तहसील में दर्ज की गई है। इसके अलावा ऊखीमठ में 23.50 मिमी और रुद्रप्रयाग तहसील क्षेत्र में 20.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। पहाड़ियों पर हो रही इस लगातार बारिश से तापमान में गिरावट आई है और मौसम सुहावना हो गया है।
अलकनंदा और मंदाकिनी सहित प्रमुख नदियों का रुख सामान्य
पहाड़ों पर लगातार हो रही मानसूनी बौछारों के बाद भी जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली अलकनंदा और मंदाकिनी समेत सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर पूरी तरह नियंत्रण में है। सुबह 8:00 बजे के मापन के अनुसार, अलकनंदा नदी का जलस्तर 623.150 मीटर और मंदाकिनी का जलस्तर 622.230 मीटर पर बना हुआ है। वहीं गंगानगर का स्तर 799.200 मीटर तथा गौरीकुंड में यह 1974.820 मीटर दर्ज किया गया है, जो स्थानीय निवासियों के लिए राहत की खबर है।
सभी जलस्रोत चेतावनी के तय मानक से नीचे
जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि वर्तमान में जिले की सभी नदियां और गाड़-गधेरे अपने-अपने चेतावनी स्तर से काफी नीचे बह रहे हैं। जलस्तर सामान्य होने के कारण तटीय इलाकों में फिलहाल बाढ़ या किसी अन्य प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। इसके बावजूद, मानसून की प्रकृति को देखते हुए जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग की टीमें नदियों के उतार-चढ़ाव पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही हैं।
आपात स्थिति के लिए प्रशासन ने जारी की विशेष अपील
संवेदनशील पहाड़ी भूगोल को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों और तीर्थयात्रियों से पूरी सतर्कता बरतने का आग्रह किया है। अधिकारियों ने अपील की है कि यदि क्षेत्र में कहीं भी कोई दैवीय आपदा, भूस्खलन, सड़क मार्ग अवरुद्ध होने या किसी भी प्रकार की दुर्घटना जैसी आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी सूचना तुरंत जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को दी जाए। समय पर सूचना मिलने से राहत और बचाव दल को मौके पर भेजकर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।
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