नैनीताल। नगर पालिका द्वारा लेक ब्रिज चुंगी का टेंडर आवंटित होने और इसका संचालन निजी ठेकेदार के हाथों में सौंपे जाने के पहले ही दिन शहर में भारी बवाल खड़ा हो गया। ठेका व्यवस्था लागू होते ही जैसे ही दोपहिया वाहनों से चुंगी शुल्क की वसूली शुरू की गई, स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। इस नई व्यवस्था के विरोध में बड़ी संख्या में अधिवक्ता सड़कों पर उतर आए और उन्होंने नगर पालिका प्रशासन व ठेकेदारी प्रथा के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

जनता और बाहरी लोगों के आर्थिक शोषण का आरोप

सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने साफ तौर पर कहा कि दोपहिया वाहनों से इस तरह टैक्स वसूलना पूरी तरह से अनुचित है। अधिवक्ताओं ने इस कदम को शहर के आम नागरिकों और जिले के बाहर से जरूरी कार्यों के लिए पहुंचने वाले लोगों का खुला शोषण करार दिया है। उनका कहना है कि रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले मध्यमवर्गीय और कामकाजी लोगों पर इस शुल्क के जरिए अतिरिक्त और बेवजह का आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पालिका की मनमानी के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

आंदोलनकारी अधिवक्ताओं ने नगर पालिका प्रशासन के इस फैसले को पूरी तरह तानाशाही और मनमाना बताया है। उन्होंने शहर के व्यापारिक मंडलों, सामाजिक संस्थाओं, छात्र संगठनों और तमाम जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे पालिका की इस जनविरोधी नीति के खिलाफ एक मंच पर आएं। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि यदि इस समय सामूहिक रूप से विरोध नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आम जनता को प्रशासन की ऐसी कई और मनमानियों का सामना करना पड़ सकता है।

चुंगी संचालन के पहले ही दिन ठप हुई व्यवस्था

लेक ब्रिज चुंगी पर ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा जैसे ही दोपहिया वाहनों को रोककर पर्ची काटना शुरू किया गया, वैसे ही मौके पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन गई। विरोध प्रदर्शन के चलते चुंगी नाके पर कुछ समय के लिए वाहनों की कतारें लग गईं और अव्यवस्था का माहौल बन गया। पहले ही दिन हुए इस तीव्र विरोध ने साफ कर दिया है कि नगर पालिका के इस फैसले को लेकर शहर के भीतर भारी असंतोष है और आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है।