अमित दांगी @ भोजपुर की आवाज़

मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकत्सा राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का गृह जिला रायसेन आज स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी विफलता का उदाहरण बन चुका है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा, जो आकस्मिक स्थितियों में मरीजों को त्वरित राहत पहुंचाने का दावा करती है, यहां लोगों के लिए मौत का सबब साबित हो रही है। जिला मुख्यालय सहित मंडीदीप, ओबेदुल्लागंज, सुल्तानपुर, बाड़ी, बरेली, उदयपुरा, सिलवानी, बेगमगंज, गैरतगंज, साँची और अन्य कस्बों से संचालित ये वाहन कभी समय पर नहीं पहुंचते। कॉल करने के बाद भी जरूरी समय से कहीं ज्यादा देरी से मौके पर पहुंचने वाले ये वाहन मरीजों और सड़क हादसों में घायलों की जान पर बन आते हैं। जिले में 41 एम्बुलेंस होने के बावजूद स्थिति इतनी खराब है कि आम नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है। स्वास्थ्य मंत्री के अपने जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की यह दुर्दशा प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है।

 

समय पर 108 के नहीं पहुंचने से यह होती परेशानी -

108 पर कॉल करने वाले पीड़ित परिवार बताते हैं कि वाहन पहुंचने में लगने वाला समय तय मानकों से कहीं अधिक होता है। इस देरी के दौरान सांस की तकलीफ, दिल का दौरा, गंभीर चोट या प्रसूति जैसी स्थितियों में मरीज की हालत तेजी से बिगड़ती जाती है। कई मामलों में परिवार खुद ही निजी वाहन या अन्य साधनों से मरीज को अस्पताल ले जाने को मजबूर हो जाते हैं, लेकिन हर किसी के पास यह सुविधा नहीं होती।

घायल तड़पते हैँ सड़कों पर -

सड़क हादसों में घायलों की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। दुर्घटना के तुरंत बाद घायल सड़क पर खून बहते हुए तड़पते रहते हैं। समय पर एम्बुलेंस न आने से खून की कमी, आंतरिक चोटें और सदमा घातक साबित हो जाते हैं। कई बार स्थानीय लोग ही घायलों को उठाकर नजदीकी अस्पताल पहुंचाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में विशेषज्ञ इलाज के लिए भोपाल या जिला अस्पताल रेफर करना पड़ता है। ऐसे में 108 की देरी सीधे-सीधे जान लेवा साबित होती है।

यहां जा चुकी मरीजों की जान -

जिले के उदयपुरा में बीते वर्ष सांस लेने में तकलीफ वाले एक मरीज के परिजनों ने 108 को फोन किया। वाहन दो घंटे देर से पहुंचा। मरीज को लेकर भोपाल की ओर रवाना होने के बाद रास्ते में ही ऑक्सीजन खत्म हो गई और मरीज की जान चली गई। परिवार आज भी इस लापरवाही को याद कर रो पड़ता है।

इसी तरह बेगमगंज में एक प्रसूता ने एम्बुलेंस के इंतजार में ही दम तोड़ दिया। प्रसव की पीड़ा सहते हुए वाहन का इंतजार करते-करते उसकी जान चली गई। ये सिर्फ दो मामले नहीं, बल्कि जिले में फैली उस व्यवस्था की सच्चाई हैं, जहां समय पर मदद न मिलने से कई परिवार उजड़ चुके हैं।

अस्पतालों में भी खड़ा होता है विवाद -

रायसेन जिले के जिन सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस की सुविधा नहीं है, वहां से आपात स्थिति में मरीजों को भोपाल या जिला मुख्यालय रेफर करने के लिए 108 को बुलाया जाता है। लेकिन वाहन समय पर न पहुंचने से अस्पताल परिसर में विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। परिजन गुस्से में अस्पताल स्टाफ से भिड़ जाते हैं, जबकि असल समस्या 108 सेवा की नाकामी है।

 

जवाबदेही हो तय -

स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल के गृह जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की यह हालत प्रशासन और विभाग दोनों के लिए शर्मनाक है। 41 एम्बुलेंस होने के बावजूद अगर मरीज और सड़क हादसे के घायल समय पर मदद नहीं पा रहे, तो यह व्यवस्था की पूरी विफलता है। प्रशासन को तुरंत जवाबदेही तय करनी होगी। वरना यह लापरवाही और मौतों का सिलसिला जारी रहेगा।

जिम्मेदारों बोले -

जिले में 108 एम्बुलेंस के 41 वाहन संचालित है, सभी वाहन फिट है, लेकिन क्षेत्र का वाहन पहले से कॉल पर होता है, इस स्थिति में दूसरे कॉल का रिस्पांस टाइम बढ़ जाता है क्योकि वाहन दूसरे स्थान से भेजा जाता है, इसके अलावा कईबार ट्रैफिक के चलते वाहन पहुंचने में समय लग जाता है।

विशाल पाल, डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर रायसेन