निदान फॉल बना जोखिम का ठिकाना, रोक के बावजूद कुंड तक पहुंच रहे पर्यटक
जबलपुर: कटंगी क्षेत्र के निकट स्थित प्रसिद्ध पहाड़ी झरने निदान फॉल पर सुरक्षा के कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं होने से बड़ा हादसा होने का अंदेशा बना हुआ है। मानसून के मौसम में यहां आने वाले पर्यटक सुरक्षा घेरा न होने के कारण बेधड़क होकर झरने के बेहद करीब बने गहरे कुंड तक पहुंच रहे हैं। तेज बहाव और फिसलन भरे पत्थरों के बावजूद लोग पानी में उतरकर नहाने का जोखिम उठा रहे हैं। पूर्व में अचानक जलस्तर बढ़ने से कई लोग यहां हादसों का शिकार हो चुके हैं, फिर भी जिम्मेदारों की अनदेखी पर्यटकों की जान पर भारी पड़ रही है।
वीकेंड पर पिकनिक मनाने उमड़ रही भीड़, युवाओं की जानलेवा लापरवाही बढ़ा रही जोखिम
बारिश का मौसम शुरू होते ही निदान फॉल पर स्थानीय लोगों और युवाओं की भारी भीड़ पिकनिक मनाने पहुंच रही है। खासतौर पर युवा वर्ग उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों से होकर सीधे झरने के मुख्य हिस्से तक पहुंच रहा है। पहाड़ियों से नीचे गिरते पानी के बीच नहाने के चक्कर में लोग जान जोखिम में डाल रहे हैं। जानकारों के अनुसार झरने के ठीक नीचे एक बहुत गहरा कुंड है, जहां ऊपर से फिसलने वाला व्यक्ति सीधे समा सकता है। हालांकि कुछ कुशल तैराक वहां छलांग लगाते दिखते हैं, लेकिन नौसिखियों के लिए यह स्थान जानलेवा साबित हो सकता है।
पूर्व में हो चुके हैं कई दर्दनाक हादसे, हाल ही में रेस्क्यू कर बचाई गई थी दो दोस्तों की जान
निदान फॉल का इतिहास गवाह है कि यहां पहले भी कई गंभीर और जानलेवा हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हाल ही में दो युवक यहां घूमने आए थे और नदी के बीच बनी एक चट्टान पर बैठे थे। इसी दौरान अचानक ऊपरी इलाके से पानी का तेज बहाव आ गया, जिससे दोनों वहीं बुरी तरह फंस गए। बाद में पुलिस और वन विभाग की टीम ने काफी मशक्कत के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उनकी जान बचाई थी। इस तरह की घटनाओं के बाद भी लोग सबक नहीं ले रहे हैं।
पुलिस का दावा समय-समय पर दी जा रही चेतावनी, वन विभाग की सुस्ती पर उठ रहे सवाल
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कटंगी पुलिस का कहना है कि उनकी टीम समय-समय पर मौके पर गश्त करती है और पर्यटकों को खतरनाक स्थानों व झरने के पास न जाने की हिदायत देती है। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर न तो कोई स्थायी चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की इस ढिलाई के कारण वीकेंड पर आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा पूरी तरह राम भरोसे बनी हुई है, जिससे कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।
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