देहरादून। उत्तराखंड में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यमुनोत्री हाईवे पर स्याना चट्टी समेत कई स्थानों पर भारी भूस्खलन और मलबे के कारण यातायात पूरी तरह ठप हो गया है, और लगातार बारिश के चलते सड़कों को खोलने का कार्य भी बाधित हो रहा है। नारायणबगड़ के थरालीबगड़ बाजार में भी हाईवे पर मलबा आने से कई दुकानों और सरकारी राशन गोदाम को नुकसान पहुंचा है, जबकि कर्णप्रयाग-सिमली मार्ग पर भी बड़े बोल्डर गिरने से आवाजाही बंद है। इसके अतिरिक्त, कर्णप्रयाग में रविवार रात से ही बिजली आपूर्ति भी बाधित चल रही है।

अत्यधिक वर्षा के लिए रेड अलर्ट और फ्लैश फ्लड का खतरा

मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले 24 घंटों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग की चेतावनी के अनुसार, मिट्टी के पूरी तरह संतृप्त होने के कारण अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आने और निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर आशंका है। खराब मौसम के मद्देनजर जिला प्रशासन ने एहतियातन बागेश्वर को छोड़कर देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और टिहरी समेत 11 जिलों में आज कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश दिए हैं।

प्रशासनिक सतर्कता और आपदा प्रबंधन की तैयारी

मौसम विभाग ने 20 जुलाई के लिए रेड और 21 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट की चेतावनी दी है, जिसके चलते जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी मशीनों और राहत दल की अग्रिम तैनाती कर दी गई है ताकि आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके। सभी विभागों को आपसी समन्वय से स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने को कहा गया है। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) को किसी भी अप्रिय घटना की सूचना तत्काल देने के आदेश दिए गए हैं।

नागरिकों के लिए प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने आम जनता से मौसम विभाग की चेतावनियों को अत्यंत गंभीरता से लेने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और जोखिम वाले स्थानों के करीब जाने से बचें। प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए जा रहे सुरक्षा दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। इस सतर्कता का उद्देश्य किसी भी संभावित आपदा के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम करना और राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करना है।