देहरादून। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देहरादून में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान देश में व्याप्त पेपर लीक माफियाओं पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने इसे एक रेस्टोरेंट के मेन्यू की तरह बताते हुए कहा कि हर परीक्षा का रेट फिक्स हो चुका है, जिससे देश के मध्यमवर्गीय छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि परीक्षाओं का आयोजन पूर्ण रूप से सरकार की जिम्मेदारी होनी चाहिए, न कि किसी निजी कंपनी की। इस संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश भर में शिक्षा प्रणाली में सुधार और संस्थानों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करने की पुरजोर वकालत की।

रोजगार के दरवाजे और युवाओं का संघर्ष

राहुल गांधी ने देश में रोजगार की दयनीय स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि युवाओं के लिए उपलब्ध पांच अवसरों में से चार दरवाजे लगभग बंद हो चुके हैं। केवल सरकारी नौकरी का ही एक विकल्प शेष है, परंतु वहां भी पारदर्शिता के बजाय पेपर लीक के जरिए धांधली हो रही है। इस मौके पर गणित शिक्षक अभिनय शर्मा ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में विफलताओं और छात्रों से आपत्ति शुल्क के नाम पर की जा रही अवैध वसूली को तुरंत बंद करने की मांग उठाई।

छात्रों का दर्द और एक पिता की पीड़ा

कार्यक्रम में नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाली देहरादून की रिया थापा के पिता राजेश गुरुंग की व्यथा सुनकर वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। उन्होंने साझा किया कि किस तरह पेपर लीक की खबर ने उनकी बेटी के सपनों को तोड़कर उसे मौत के आगोश में धकेल दिया। मंच पर मौजूद अन्य छात्रों ने भी उत्तराखंड पटवारी भर्ती और बिहार शिक्षक भर्ती जैसे प्रकरणों का उल्लेख करते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की। युवाओं ने सवाल किया कि सालों की कड़ी मेहनत के बाद भी उन्हें केवल निराशा ही क्यों हाथ लग रही है और इस पेपर लीक बीमारी का स्थायी इलाज क्या है।

परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कड़े सुझाव

राहुल गांधी ने इस संकट से निपटने के लिए एक 'छात्र-केंद्रित' और सुरक्षित परीक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में रैंडमाइजेशन अनिवार्य होना चाहिए और विश्वविद्यालयों को किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव से मुक्त रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पेपर लीक करने वाले दोषियों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई हो और प्रभावित छात्रों को उचित मुआवजा दिया जाए। कार्यक्रम में भारी बारिश के बावजूद उमड़ी युवाओं की भीड़ यह साबित करने के लिए काफी थी कि देश का युवा अब शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन की मांग कर रहा है।