देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी में आज लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी युवाओं व छात्रों से सीधा संवाद करने जा रहे हैं। 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी प्रदेश के युवाओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को मंच पर उठाएंगे। इस दौरे में सबसे ज्यादा ध्यान उत्तराखंड के चर्चित और विवादित पेपर लीक मामलों पर रहने वाला है, क्योंकि राज्य का युवा लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। कांग्रेस की रणनीति इस दौरे के माध्यम से सीधे तौर पर उन युवाओं को अपने पाले में करने की है, जिनका भविष्य इन पेपर लीक हादसों की वजह से अधर में लटका रहा।

युवाओं और प्रतियोगी छात्रों की समस्याओं पर रहेगा फोकस

कांग्रेस पार्टी ने इस कार्यक्रम के लिए देहरादून के बन्नू स्कूल ग्राउंड में व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं। पार्टी का उद्देश्य केवल एक राजनीतिक भाषण देना नहीं है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और बेरोजगार युवाओं की जमीनी समस्याओं को समझना और उनसे सीधा संवाद स्थापित करना है। इस कार्यक्रम के डिजिटल प्रसारण की भी पुख्ता व्यवस्था की गई है ताकि राज्य के कोने-कोने में बैठे युवा इस संवाद का हिस्सा बन सकें। राहुल गांधी के संबोधन में मुख्य रूप से रोजगार की कमी, भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली अनावश्यक देरी और बार-बार होने वाले पेपर लीक के मानसिक व आर्थिक दुष्प्रभावों का जिक्र रहेगा।

उत्तराखंड में भर्ती घोटालों और पेपर लीक का इतिहास

राज्य में पेपर लीक का मुद्दा बेहद संवेदनशील रहा है। इसकी शुरुआत दिसंबर 2021 में आयोजित उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से हुई थी, जिसका पर्दाफाश जुलाई 2022 में हुआ। जांच में पता चला कि प्रश्नपत्र पहले ही लीक कर लाखों रुपये में बेच दिए गए थे, जिसके बाद इस परीक्षा को निरस्त कर दिया गया और एसटीएफ ने मुख्य आरोपी हाकम सिंह सहित 20 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया।

इसके तुरंत बाद दिसंबर 2022 की सहायक लेखाकार परीक्षा, जनवरी 2023 की पटवारी-लेखपाल परीक्षा और फरवरी 2023 की सचिवालय रक्षक परीक्षा में भी धांधली के गंभीर आरोप लगे। इन सभी मामलों में एसटीएफ की जांच के बाद परीक्षाओं को रद्द कर नए सिरे से आयोजित करना पड़ा। कनिष्ठ अभियंता (JE) और पुलिस कांस्टेबल जैसी परीक्षाओं पर भी सवाल उठे, जिससे कई भर्तियों को रोकना पड़ा। यह सिलसिला यहीं नहीं थमा, हाल ही में सितंबर 2025 में हुई UKSSSC की स्नातक स्तरीय परीक्षा का प्रश्नपत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसे भारी आक्रोश के बाद अक्टूबर 2025 में रद्द करना पड़ा। इन लगातार हुए घोटालों के खिलाफ प्रदेश के युवाओं ने गांधी पार्क से लेकर सचिवालय तक सड़कों पर उतरकर ऐतिहासिक प्रदर्शन किए थे।

कड़े नकल विरोधी कानून पर राजनीतिक रार

भर्ती घोटालों पर बढ़ते जन आक्रोश के बाद धामी सरकार ने साल 2023 में देश का सबसे सख्त 'उत्तराखंड सार्वजनिक परीक्षा कानून' लागू किया। इस कानून के तहत पेपर लीक और नकल माफियाओं के खिलाफ संपत्ति कुर्क करने, भारी जुर्माना लगाने और उम्रकैद तक की सख्त सजा के प्रावधान किए गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया था।

दूसरी ओर, कांग्रेस इस कानून को काफी देर से उठाया गया कदम मानती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सूर्यकांत धस्माना का आरोप है कि कानून बनने से पहले ही हजारों युवाओं का कीमती समय और करियर बर्बाद हो चुका था। कई युवा मानसिक तनाव के कारण अवसाद में चले गए। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी इन्हीं पीड़ित युवाओं की आवाज बनकर सरकार की विफलताओं को उजागर करेंगे और रोजगार सुरक्षा को कांग्रेस की प्राथमिकता के रूप में पेश करेंगे।

सत्तापक्ष का पलटवार और सरकार की दलील

कांग्रेस के इन तीखे हमलों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने गड़बड़ियों को छिपाने के बजाय खुद जांच के आदेश दिए और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा। सरकार ने पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए देश का सबसे कड़ा नकल विरोधी कानून बनाया है। भाजपा का दावा है कि राज्य के समझदार और पढ़े-लिखे युवा जानते हैं कि कौन सी सरकार उनके भविष्य के प्रति गंभीर है, इसलिए राहुल गांधी के राजनीतिक बयानों का उत्तराखंड के युवाओं पर कोई असर नहीं होने वाला है।