देहरादून: उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित लोकपर्व 'हरेला' आज पूरे प्रदेश में पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह अनूठा त्योहार न केवल प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने और हरियाली की कामना का उत्सव है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे माता पार्वती और भगवान शिव के पवित्र मिलन का प्रतीक भी माना जाता है। आज सुबह शुभ मुहूर्त में, नौ दिन पहले टोकरियों में बोए गए पवित्र हरेले (पौधों) की कटाई की गई। इसके बाद घर के बुजुर्गों ने सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करते हुए हरेले के तिनकों को परिवार के सभी सदस्यों के सिर और कान पर रखकर पारंपरिक आशीर्वाद दिया।

10 लाख पौधों के रोपण का महाअभियान

इस वर्ष हरेला पर्व को केवल एक धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखकर इसे पर्यावरण संरक्षण के एक बड़े आंदोलन में बदल दिया गया है। देवभूमि उत्तराखंड को अधिक हरा-भरा और सुंदर बनाने के संकल्प के साथ आज पूरे राज्य में एक ही दिन में 10 लाख से अधिक पौधे लगाने का महाअभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम के तहत वन विभाग, सामाजिक संगठनों, स्कूलों और आम जनता की भागीदारी से प्रदेश के कोने-कोने में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दी प्रदेशवासियों को बधाई

इस पावन अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समस्त प्रदेशवासियों और देश-विदेश में रह रहे उत्तराखंडी समाज को हरेला पर्व की आत्मीय बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। मुख्यमंत्री ने अपने विशेष संदेश में इस लोकपर्व की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा:

"प्रकृति के संरक्षण, संवर्धन और पर्यावरण चेतना के प्रतीक लोकपर्व 'हरेला' की सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं। यह पर्व हमें अपनी मिट्टी और प्रकृति से जुड़ने का संदेश देता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम सब मिलकर अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लें और अपनी देवभूमि की धरा को समृद्ध, खुशहाल और हरा-भरा बनाने में अपना अमूल्य योगदान दें।"