पिथौरागढ़| उत्तराखंड के सीमांत जनपद में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। तवाघाट-लिपुलेख और सोबला-तिदांग जैसे सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग बंद होने के कारण चीन सीमा का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। सीमाई क्षेत्रों को जोड़ने वाले थल-मुनस्यारी मोटर मार्ग सहित जिले की 18 से अधिक लिंक सड़कें मलबे की चपेट में आने से बंद पड़ी हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और प्रवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, प्रशासनिक बंदोबस्त के तहत प्रसिद्ध धार्मिक यात्राएं अपने निर्धारित शेड्यूल के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।

तीसरे दल ने किए आदि कैलास के दर्शन, नावीढांग के लिए भारी सुरक्षा के बीच प्रस्थान

सड़कें बंद होने और मौसम की चुनौतियों के बावजूद आदि कैलास की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। तीसरे कैलास मानसरोवर यात्रा दल के सभी सदस्य गुरुवार सुबह आधार शिविर गुंजी से आदि कैलास के पवित्र दर्शनों के लिए रवाना हुए।

वहां दर्शन और पूजा-अर्चना पूरी करने के बाद यह दल सुरक्षित रूप से वापस गुंजी लौट आया है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, गुंजी में कुछ समय विश्राम करने के बाद इस जत्थे को नावीढांग के लिए रवाना किया जाएगा। यात्रा से जुड़े स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस दल के सभी यात्रियों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण (मेडिकल चेकअप) किया गया था, जिसमें सभी सदस्य पूरी तरह फिट और सफल पाए गए हैं।

चीन सीमा के पार तिब्बत में दूसरे और पहले दल की हलचल तेज, शनिवार को होगी वतन वापसी

दूसरी ओर, तिब्बत (चीन) के रास्ते चल रही मुख्य कैलास मानसरोवर यात्रा भी अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। जानकारी के अनुसार, यात्रा का दूसरा दल तिब्बत के प्रमुख पड़ाव तकलाकोट से कैलास पर्वत की मुख्य परिक्रमा और दर्शन के लिए आगे की ओर कूच कर चुका है।

वहीं, इस यात्रा पर गया पहला दल तिब्बत में कैलास पर्वत की कठिन और पवित्र परिक्रमा को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अब छुगु पहुंच रहा है। छुगु में पवित्र मानसरोवर झील की परिक्रमा और धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न करने के बाद, यह पहला दल शनिवार को लिपुलेख दर्रे के रास्ते वापस भारत की सीमा में प्रवेश करेगा, जिसके स्वागत के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम और स्थानीय प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

सड़कों को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर चल रहा है रेस्क्यू कार्य

आपदा प्रबंधन विभाग और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमें बंद पड़े 18 मार्गों और थल-मुनस्यारी रोड को खोलने के लिए लगातार जुटी हुई हैं। कई जगहों पर भारी चट्टानें खिसकने से मलबे को हटाने में परेशानी आ रही है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों और तीर्थयात्रियों को मौसम के पल-पल बदलते मिजाज को देखते हुए सतर्क रहने और केवल सुरक्षित रूटों का ही इस्तेमाल करने की हिदायत दी है।