उत्तराखंड में नई शराब दुकानों पर रोक, हाई कोर्ट में आबकारी नीति का बड़ा खुलासा
नैनीताल| उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने टिहरी गढ़वाल जिले के जौनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले हटवाल गांव में एक नई शराब की दुकान खोले जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और आबकारी विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। यह कानूनी विवाद तब और गहरा गया जब स्थानीय जनता के भारी विरोध के बाद जिलाधिकारी द्वारा बंद कराई गई दुकान को आबकारी आयुक्त ने दोबारा खोलने की अनुमति दे दी। इस फैसले के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, जिसके बाद यह मामला अब अदालत की दहलीज पर पहुंच चुका है।
जिला पंचायत सदस्य ने ग्रामीणों की तरफ से उठाई आवाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टिहरी गढ़वाल के जौनपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली भूतसी जिला पंचायत की सदस्य सीता देवी मनवाल ने क्षेत्र की महिलाओं और स्थानीय नागरिकों की तरफ से उत्तराखंड हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि हटवाल गांव में हाल ही में खोली गई मदिरा की नई दुकान से क्षेत्र का सामाजिक और शांत माहौल पूरी तरह से खराब हो रहा है। विशेषकर महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा को लेकर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते ग्रामीण लंबे समय से इस दुकान का विरोध कर रहे हैं।
आबकारी आयुक्त के विरोधाभासी फैसले पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ग्रामीणों के उग्र आंदोलन और भारी जनाक्रोश को देखते हुए टिहरी गढ़वाल के जिलाधिकारी (DM) ने जनहित की रक्षा के लिए इस शराब की दुकान के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी और दुकान को बंद करने का आदेश जारी किया था।
हालांकि, इस प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ शराब विक्रेता ने उच्चाधिकारियों के समक्ष अपील दायर कर दी। इस अपील पर सुनवाई करते हुए आबकारी आयुक्त ने 16 मई को एक ऐसा आदेश पारित किया जो अब चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। आबकारी आयुक्त ने अपने निर्णय में यह तो स्वीकार किया कि आम जनता और स्थानीय निवासियों की भावनाओं के अनुरूप ही शराब की दुकान का संचालन किया जाना संभव है, लेकिन इस टिप्पणी के बावजूद उन्होंने जिलाधिकारी द्वारा लगाई गई कानूनी रोक को पूरी तरह से हटा दिया। आबकारी आयुक्त से हरी झंडी मिलते ही शराब विक्रेता ने गांव में दोबारा दुकान का संचालन शुरू कर दिया है।
न्यायालय ने आबकारी विभाग और प्रशासन से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि जब एक तरफ आबकारी आयुक्त खुद मान रहे हैं कि जनता की भावनाएं सर्वोपरि हैं, तो दूसरी तरफ जिलाधिकारी के तार्किक फैसले को पलटना पूरी तरह से अनुचित और विरोधाभासी है। कोर्ट ने जनभावनाओं और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है। उच्च न्यायालय ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी कर इस संबंध में एक विस्तृत और स्पष्ट रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है, ताकि यह तय किया जा सके कि घनी आबादी और स्थानीय विरोध के बीच इस दुकान का संचालन जारी रहना चाहिए या नहीं।
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