देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त (एनडी) तिवारी के सर्वाधिक दिनों तक पद पर रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। एनडी तिवारी राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा किया था और वे कुल 1831 दिनों तक इस पद पर रहे थे। वर्तमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल को अब 1832 दिन पूरे हो चुके हैं, जिसके साथ ही यह ऐतिहासिक कीर्तिमान उनके नाम दर्ज हो गया है।

सीएम धामी के नाम दर्ज हुए दो बड़े रिकॉर्ड पुष्कर सिंह धामी ने महज पांच दिनों के भीतर दो बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। इससे पहले 4 जुलाई को वे पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बने थे और अब उन्होंने सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का गौरव भी हासिल कर लिया है। धामी ने पहली बार 4 जुलाई 2021 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली थी। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बाद पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया और वे तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल और दलीय स्थिति राज्य के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो उत्तराखंड को अब तक कांग्रेस ने 3 और भाजपा ने 7 मुख्यमंत्री दिए हैं। कांग्रेस की ओर से एनडी तिवारी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत मुख्यमंत्री बने, जिनमें से केवल एनडी तिवारी ही 5 साल का कार्यकाल पूरा कर सके थे। वहीं भाजपा की तरफ से नित्यानंद स्वामी, भगत सिंह कोश्यारी, भुवन चंद्र खंडूड़ी, रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत और पुष्कर सिंह धामी ने नेतृत्व किया। कार्यकाल के मामले में अब पुष्कर सिंह धामी (1832 दिन) शीर्ष पर हैं, जबकि एनडी तिवारी (1831 दिन) दूसरे, त्रिवेंद्र सिंह रावत (1452 दिन) तीसरे और हरीश रावत (1148 दिन) चौथे स्थान पर हैं।

विद्यार्थी परिषद से मुख्यमंत्री पद तक का सफर पुष्कर सिंह धामी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से की थी। लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वे एबीवीपी के उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव रहे। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उन्होंने दो बार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। चुनावी राजनीति में उन्होंने साल 2012 में खटीमा विधानसभा सीट से पहली बार जीत दर्ज की और 2017 में भी यहीं से विधायक चुने गए। साल 2021 में तीरथ सिंह रावत के इस्तीफे के बाद उन्हें सूबे का मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि, 2022 के मुख्य चुनाव में वे खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन पार्टी ने उनके नेतृत्व पर भरोसा कायम रखा और बाद में उन्होंने चंपावत सीट से उपचुनाव जीतकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई।