देहरादून राजधानी के प्रसिद्ध लक्ष्मण सिद्ध मंदिर के समीपवर्ती बेहद घने और दुर्गम जंगलों में मंगलवार की शाम रास्ता भटक जाने के कारण पांच महिलाओं की जान आफत में फंस गई। घने पेड़ों, अंधेरे और वन्यजीवों के खतरे के बीच फंसी महिलाओं को सुरक्षित निकालने के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) ने एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन की टीम स्थानीय पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर सक्रिय हुई और समय रहते सभी महिलाओं को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

कंट्रोल रूम की सूचना पर हरकत में आई रेस्क्यू टीम

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब देहरादून जिला नियंत्रण कक्ष (डीसीआर) और हर्रावाला पुलिस चौकी को जंगल से एक आपातकालीन संदेश प्राप्त हुआ। इस संदेश में बताया गया कि पांच महिलाएं लक्ष्मण सिद्ध मंदिर के पीछे स्थित घने वन क्षेत्र की तरफ गई थीं, लेकिन दिशा का अंदाजा न रहने के कारण वे बेहद अंदरूनी इलाके में जाकर रास्ता भूल गई हैं। वन क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क की आंख-मिचौली और खुद से बाहर निकलने के तमाम रास्ते बंद होने के बाद उन्होंने मदद की गुहार लगाई, जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरक्षी शैलेंद्र रावत के नेतृत्व में एसडीआरएफ की एक विशेष इकाई को तत्काल घटना स्थल के लिए रवाना किया गया।

घने जंगल में बारह किलोमीटर का पैदल सर्च अभियान

जंगल की भौगोलिक स्थिति बेहद जटिल होने के कारण रेस्क्यू टीम के सामने चुनौतियां बहुत बड़ी थीं। घने जंगलों, तीखी ढलानों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बीच अंधेरा बढ़ने के कारण सर्च ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही थीं, लेकिन जांबाज जवानों ने हार नहीं मानी। संयुक्त टीम ने टॉर्च और आधुनिक ट्रैकिंग उपकरणों की मदद से बीहड़ वन क्षेत्र के भीतर करीब 12 किलोमीटर तक सघन और जोखिम भरा पैदल सर्च ऑपरेशन चलाया। टीम लगातार आवाजें देकर और झाड़ियों को खंगालते हुए महिलाओं की लोकेशन ट्रेस करने की कोशिश में जुटी रही।

कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित रोड हेड तक लाई गईं महिलाएं

कई घंटों की भारी मशक्कत और लगातार की गई खोज के बाद आखिरकार रेस्क्यू टीम को जंगल के एक सुदूर हिस्से में घबराई हुई हालत में बैठी सभी पांचों महिलाएं मिल गईं। जवानों ने सबसे पहले उन्हें ढांढस बंधाया, पीने का पानी उपलब्ध कराया और उनकी प्राथमिक सेहत की जांच की। इसके बाद, रात के पथरीले रास्तों से बेहद सावधानीपूर्वक चलते हुए टीम उन सभी को सकुशल मुख्य सड़क (रोड हेड) तक लेकर आई। वहां से सभी महिलाओं को अग्रिम औपचारिकताओं और उनके परिजनों को सौंपने के लिए हर्रावाला चौकी पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।

एसडीआरएफ ने जारी की गाइडलाइन और यात्रियों से की विशेष अपील

एसडीआरएफ की इस त्वरित और सूझबूझ भरी कार्रवाई की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है, क्योंकि थोड़ी सी भी देरी महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद एसडीआरएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने आम जनता, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक आवश्यक परामर्श जारी किया है। प्रशासन ने सख्त लहजे में अपील की है कि किसी भी वन्य या पहाड़ी क्षेत्र में ट्रैकिंग अथवा भ्रमण के दौरान कभी भी मुख्य और निर्धारित रास्तों को छोड़कर अनजान पगडंडियों पर न जाएं, साथ ही मौसम और समय का विशेष ध्यान रखते हुए पूरी सुरक्षा सावधानियों के साथ ही ऐसे इलाकों में प्रवेश करें।