सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की बेचैनी, सेना ने दी कड़ी चेतावनी
इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को लेकर एक बार फिर गंभीर तनाव की स्थिति बनती दिख रही है। पाकिस्तानी सेना के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैन्य नेतृत्व ने यह रुख अपनाया है कि इस ऐतिहासिक समझौते के प्रावधानों के तहत पाकिस्तान के हिस्से का पानी हासिल करने के लिए सेना हर मुमकिन कदम उठाएगी। सीमा पार से आया यह बयान दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सामरिक मोर्चे पर तल्खी को और ज्यादा बढ़ा सकता है।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने उठाया था सख्त कदम
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि पिछले साल की एक बड़ी घटना से जुड़ी है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले के बाद, भारत सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार किया था। इसके परिणामस्वरूप, भारत ने 22 अप्रैल 2025 को सिंधु नदी तंत्र से पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को रोकने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। भारत का स्पष्ट मानना रहा है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय समझौते एक साथ नहीं चल सकते, जिसके बाद से ही पानी की आपूर्ति को लेकर दोनों देशों में रार मची हुई है।
66 साल पुराने समझौते पर मंडराया संकट
साल 1960 में विश्व बैंक (World Bank) की मध्यस्थता में हुए सिंधु जल समझौते के तहत दोनों देशों के बीच छह नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था। इस संधि के अनुसार, तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) पर भारत का पूरा अधिकार है, जबकि तीन पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चेनाब) का अधिकांश पानी पाकिस्तान को मिलना तय हुआ था। हालांकि, पिछले साल भारत द्वारा उठाए गए सख्त कदमों के बाद से इस 66 साल पुराने समझौते के अस्तित्व पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घेराबंदी की तैयारी में पाकिस्तान
पाकिस्तानी सैन्य और प्रशासनिक हलकों में मची इस खलबली के बीच यह भी संकेत मिल रहे हैं कि इस्लामाबाद इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत (Court of Arbitration) और विश्व बैंक के समक्ष नए सिरे से उठाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पानी की कमी से देश के कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी तरफ, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और जल शक्ति मंत्रालय की इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर है और सीमावर्ती नदी क्षेत्रों में निगरानी व जल प्रबंधन को पहले से अधिक मजबूत कर दिया गया है।
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