उत्तराखंड का सबसे प्यारा मेहमान! दुर्लभ सफेद बंदर 'मोंटी' की कहानी दिल जीत लेगी
अल्मोड़ा: कभी-कभी कुदरत का कोई अनोखा संयोग या एक छोटी सी घटना ऐसी दिलचस्प कहानी बन जाती है, जो दशकों तक लोगों के दिलों और यादों में जिंदा रहती है। उत्तराखंड के खूबसूरत पर्वतीय क्षेत्र अल्मोड़ा के प्रसिद्ध मृग विहार (रेस्क्यू सेंटर) में रह रहा एक अत्यंत दुर्लभ सफेद रंग का बंदर, जिसका नाम 'मोंटी' है, आज ऐसी ही एक अनूठी और अद्भुत कहानी का जीवंत हिस्सा बना हुआ है।
साल 2004 में सात समंदर पार से आया था मोंटी
इस दुर्लभ सफेद बंदर की कहानी बेहद दिलचस्प है। बात साल 2004 की है, जब इंग्लैंड से आए एक विदेशी पर्यटक के साथ यह अनोखा बंदर अल्मोड़ा पहुंचा था। पर्यटक के वापस लौटने के बाद मोंटी को स्थानीय वन्यजीव विभाग की देखरेख में यहाँ के मृग विहार रेस्क्यू सेंटर में रख दिया गया। तब से लेकर आज तक, यानी पिछले करीब 22 वर्षों से मोंटी इसी रेस्क्यू सेंटर में रह रहा है और अब वह इस जगह की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है।
अपनी दुर्लभ रंगत से बच्चों और सैलानियों का जीत रहा दिल
मोंटी की खासियत: मोंटी आम बंदरों जैसा बिल्कुल नहीं है। उसका पूरा शरीर बर्फीला सफेद है, जो उसे बाकी बंदरों से एकदम जुदा और खास बनाता है। अपनी इसी अनूठी सफेद रंगत और बेहद शांत व मिलनसार स्वभाव के कारण वह यहाँ आने वाले पर्यटकों, खासकर छोटे बच्चों के आकर्षण का सबसे प्रमुख केंद्र बना हुआ है। लोग दूर-दूर से इस अनोखे सफेद बंदर की एक झलक पाने के लिए अल्मोड़ा के मृग विहार पहुंचते हैं।
वन्यजीव प्रेमियों के लिए बना शोध का विषय
मृग विहार के वन कर्मियों और डॉक्टरों के मुताबिक, मोंटी की उम्र अब काफी हो चुकी है, लेकिन उसकी फुर्ती और इंसानों के साथ उसका दोस्ताना व्यवहार आज भी पहले जैसा ही है। वन्यजीव विशेषज्ञ उसके इस दुर्लभ सफेद रंग को एक प्राकृतिक जेनेटिक बदलाव (एल्बिनिज्म) का हिस्सा मानते हैं, जो बहुत कम देखने को मिलता है। मोंटी न केवल सैलानियों का मनोरंजन कर रहा है, बल्कि वह अल्मोड़ा के पर्यावरण और पर्यटन को बढ़ावा देने में भी एक अनूठा योगदान दे रहा है।
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